| क्रमांक | नरेश का नाम एवं ऐतिहासिक विवरण |
|---|---|
| 1 | आदि नारायण (अव्यक्त) (सृष्टि के प्रारम्भ में विश्व जलमय था। वहाँ नारायण विद्यमान थे। उनकी नाभि से कमल और कमल से ब्रह्मा प्रकट हुए। इस कारण ब्रह्मा को अयोनिज कहते हैं) (नोटः आदित्य नारायण से लेकर सुमित्र तक की वंशावली पुराणों में वर्णित है) |
| 2 | ब्रह्मा (अयोनिज) |
| 3 | मरीचि |
| 4 | कश्यप |
| 5 | विवस्वान् (वैवस्वत-सूर्य) (सूर्यवंश का आरम्भ) |
| 6 | मनु |
| 7 | इक्ष्वाकु (इनसे यह वंश इक्ष्वाकु वंश कहलाया) |
| 8 | विकुक्षि (शशाद) |
| 9 | पुरंजय (ककुत्स्थ) |
| 10 | अनेना |
| 11 | पृथु |
| 12 | विश्वरंधि (विश्वगश्व/विश्ववसु/विष्टराश्व) |
| 13 | चन्द्र (अदि/आई:) |
| 14 | युवनाश्व (प्रथम) |
| 15 | शावस्त (आवस्त) |
| 16 | बृहदश्व |
| 17 | कुवल्याश्व (धुंधुमार/कुबलाश्व मधुर्केटम के पुत्र धुंधु को मारने के कारण धुंधुमार भी कहलाये) |
| 18 | दृढाश्व |
| 19 | हर्यश्व |
| 20 | निकुंभ |
| 21 | बर्हणाश्व (वर्हणाश्य/संहताश्व) |
| 22 | कृशाश्व |
| 23 | सेनजित (सुदयुम्न/प्रसेनजित) |
| 24 | युवनाश्व-द्वितीय |
| 25 | मान्धाता (त्रसदस्यु) |
| 26 | पुरुकुत्स |
| 27 | त्रसदस्यु-द्वितीय |
| 28 | अनरण्य (सभूत) |
| 29 | हर्यश्व (सुधन्वा) |
| 30 | अरुण (त्रिधन्वा) |
| 31 | त्रिबंधन (त्र्यारुण) |
| 32 | सत्यव्रत (त्रिशंकु) |
| 33 | हरिश्चन्द्र |
| 34 | रोहित |
| 35 | हरित |
| 36 | चम्प (चंप) |
| 37 | सुदेव |
| 38 | विजय |
| 39 | भरुक (रुरूक) |
| 40 | वृक |
| 41 | बाहुक (बाहु) |
| 42 | सगर |
| 43 | असमंजस (पञ्चजन) |
| 44 | अशुमान |
| 45 | दिलीप |
| 46 | भगीरथ |
| 47 | श्रुत |
| 48 | नाभ (नाभाग/अम्बरीष) |
| 49 | सिंधुद्वीप |
| 50 | अयुतायु (अयुतायुत/अयुताजित) |
| 51 | ऋतुपर्ण |
| 52 | सर्वकाम (सर्वकर्म/आर्तुपर्णि) |
| 53 | सुदास |
| 54 | मित्रसह (कल्माषपाद/सौदास) |
| 55 | अश्मक (सर्वकर्मा/अनरण्य) |
| 56 | मूलक (निघ्न) |
| 57 | दशरथ-प्रथम (अनमित्र) |
| 58 | एडविड (दुलिदुङ/एलवित) |
| 59 | विश्वसह |
| 60 | खट्वांग |
| 61 | दीर्घबाहु (दिलीप) |
| 62 | रघु (रघुवंश आरंभ) |
| 63 | अज |
| 64 | दशरथ द्वितीय |
| 65 | “श्रीराम”-लक्ष्मण-भरत-शत्रुघ्न |
| 66 | “कुश”-लव (राजद्रशस्तिः महाकाव्यम् द्वितीयः सर्गः तीसरी शिला, श्लोक सं. 18. पृ.24) |
| 67 | अतिथि |
| 68 | निषध |
| 69 | नल |
| 70 | पुण्डरीक |
| 71 | क्षेमधन्वा |
| 72 | देवानीक |
| 73 | अहीन (अहिनमू) |
| 74 | पारियात्र (सुमन्या) |
| 75 | बल (बलस्थल/अनल) |
| 76 | स्थल (उक्थ) |
| 77 | वज्रनाम प्रथम |
| 78 | संगण (क्षमण/शंख) |
| 79 | विघृति |
| 80 | हिरण्यनाभ |
| 81 | पुष्य |
| 82 | ध्रुवसिद्धि (अर्थसिद्धि) |
| 83 | सुदर्शन |
| 84 | अग्निवर्ण |
| 85 | शीघ्र |
| 86 | मरुत (मरु) |
| 87 | प्रसुश्रुत |
| 88 | संधि |
| 89 | मर्षण (अमर्षण) |
| 90 | महस्वान |
| 91 | विश्वसाह्व |
| 92 | प्रसेनजित-प्रथम |
| 93 | तक्षक |
| 94 | बृहद्-बल (महाभारत संग्राम में काम आये।) |
| 95 | बृहद्रण (बृहदण) |
| 96 | उरुक्रिय |
| 97 | वत्सवृद्ध |
| 98 | प्रतिव्योम |
| 99 | भानु |
| 100 | दिवाक (पदवी "वाहिनी पति") |
| 101 | सहदेव |
| 102 | बृहदश्व |
| 103 | भानुमान |
| 104 | प्रतीकाश्व |
| 105 | सुप्रतीक |
| 106 | मरुदेव |
| 107 | सुनक्षत्र |
| 108 | पुष्कर |
| 109 | अंतरिक्ष |
| 110 | सुतपा |
| 111 | मित्रजित (अमित्रजित) |
| 112 | बृहदभ्राज (बृहद्राज) |
| 113 | बर्हि |
| 114 | कृतंजय |
| 115 | रणंजय |
| 116 | संजय |
| 117 | शाक्य |
| 118 | शुद्धोद (शुद्धोदन) |
| 119 | लांगल |
| 120 | प्रसेनजित-द्वितीय |
| 121 | शुद्धक |
| 122 | रुणक (रणक) |
| 123 | सुरथ |
| 124 | सुमित्र (भागवत के नवम स्कन्ध, राजप्रशस्ति एवं हरिवंश पुराण में उल्लेखित।) |
| 125 | बज्रनाभ-द्वितीय (वीर्यनाभ) |
| 126 | महारथी (जीतशत्रु सेन) |
| 127 | महासेन-प्रथम |
| 128 | हंससेन |
| 129 | बन्द्रसेन |
| 130 | सुधमसेन |
| 131 | सुहिलसेन |
| 132 | विक्रमसेन |
| 133 | महारथी |
| 134 | अतिरथी |
| 135 | अवलसेन |
| 136 | कनकसेन |
| 137 | सौमिल |
| 138 | महासेन द्वितीय |
| 139 | विजयसेन (दिग्विजयसेन) |
| 140 | अजयसेन |
| 141 | अभंगसेन |
| 142 | महाभयसेन (मदनसेन / महामदनसेन) |
| 143 | सिंहस्थ (सिंहराय) (सिंहस्थ तक अयोध्या में रहे, इनके वंशज दक्षिण देश जीत कर वहीं राज्य कायम किया।) |
| 144 | सिद्धरथ |
| 145 | सुजादित्य (सुजसादित्य / सुयशादित्य) |
| 146 | सुमुखादित्य |
| 147 | घरपतसेन |
| 148 | सुदन्तसेन |
| 149 | विजयभूप (विजयादित्य) |
| 150 | सोमदत्त (सोमादित्य/शिवासेन) |
| 151 | विजयसेन (मैत्रकवंश) |
| 152 | घरसेन |
| 153 | द्रोणसेन |
| 154 | ध्रुवसेन |
| 155 | घरपत |
| 156 | गृहसेन (यहां तक वल्लभी रहे तथा गुहांदित्य के वंशज मेवाड़ के नरेश हुए।) |
| गुहिलोत कुल (मेवाड़) | |
| 157 | (1) गुहिल (गुहादित्य/मुहदत्त) |
| 158 | (2) भोज (गोजादित्य) |
| 159 | (3) महेन्द्र प्रथम |
| 160 | (4) नाग (नागादित्व) |
| 161 | (5) शिलादित्य |
| 162 | (6) अपराजित |
| 163 | (7) महेन्द्र द्वितीय |
| 164 | (8) कालभोज (बापा रावल) (बापा ने रावल की पदवी धारण की) |
| 165 | (9) खुमान प्रथम |
| 166 | (10) मत्तट |
| 167 | (11) भर्तृभट्ट -प्रथम |
| 168 | (12) सिंह |
| 169 | (13) खुमान-द्वितीय |
| 170 | (14) महायक |
| 171 | (15) खुमान-तृतीय |
| 172 | (16) भर्तृभट्ट द्वितीय |
| 173 | (17) अल्लट |
| 174 | (18) नरवाहन |
| 175 | (19) शालिवाहन |
| 176 | (20) शक्तिकुमार |
| 177 | (21) अम्बाप्रसाद |
| 178 | (22) सुविवर्मा |
| 179 | (23) नरवर्मा |
| 180 | (24) कीर्ति वर्मा |
| 181 | (25) योगराज |
| 182 | (26) वैरठ |
| 183 | (27) हँसपाल (हंसराज) |
| 184 | (28) वैरसिंह (वैरिसिंह) |
| 185 | (29) विजयसिंह |
| 186 | (30) अरिसिंह प्रथम |
| 187 | (31) चौड़सिंह/ (बौडसिंह) |
| 188 | (32) विक्रमसिंह |
| 189 | (33) रणसिंह |
| शिशोद / सिसोदिया वंश | |
| 190 | (34) क्षेमसिंह (शिशोदवंश / सिसोदिया वंश) |
| 191 | (35) सामन्तसिंह |
| 192 | (36) कुमारसिंह |
| 193 | (37) मथनसिंह / (मंथनसिंह) |
| 194 | (38) पदमसिंह |
| 195 | (39) जैत्रसिंह |
| 196 | (40) तेजसिह |
| 197 | (41) समरसिंह |
| 198 | (42) रतनसिंह (रत्नसिंह) |
| 199 | (43) हम्मीरसिंह |
| 200 | (44) खेता (क्षेत्रसिंह) |
| 201 | (45) लाखा (लक्षसिंह) |
| 202 | (46) मोकल |
| 203 | (47) कुम्भा |
| 204 | (48) ऊदा (उदय-प्रथम) |
| 205 | (49) रायमल |
| 206 | (50) संग्रामसिंह-प्रथम (सांगा) |
| 207 | (51) रतनसिंह द्वितीय |
| 208 | (52) विक्रमादित्य (विक्रमसिंह) |
| 209 | (53) उदयसिंह द्वितीय |
| 210 | (54) प्रतापसिंह प्रथम (महाराणा प्रताप) |
| 211 | पूरणमल (पूरा जी) (महाराणा प्रतापसिंहजी-प्रथम के 11वें पुत्र) |
| 212 | सावंलदास (सबलसिंह) (मलिकपुर, गुजरात) |
| 213 | लालसिंह |
| 214 | केसरसिंह |
| 215 | गुमानसिंह |
| 216 | जगरूपसिंह |
| 217 | नाम अज्ञात (वंशावली अभिलेख लुप्त) |
| 218 | वधार सिंह |
| 219 | प्रतापसिंह |
| 220 | दलेलसिंह |
| 221 | मोकमसिंह |
| 222 | जोरावरसिंह |
| 223 | रणजीतसिंह |
| 224 | चंदनसिंह |
| 225 | महेन्द्रसिंह |
| 226 | भार्गवसिंह सिसोदिया |
📜 महत्वपूर्ण नोट एवं ऐतिहासिक सन्दर्भ
भगवान विवस्वान (सूर्य) से लेकर राजा सुमित्र तक के नरेशों की पौराणिक वंशावली का विस्तृत उल्लेख निम्नलिखित प्रमाणित ग्रंथों से संकलित किया गया है:
- 1- वाल्मीकीय रामायण
- 2- श्रीमद् भागवत पुराण
- 3- हरिवंश
- 4- एकलिंग माहात्म्यम्
- 5- राजविलास
- 6- मुहणोत नैणसी री ख्यात
- 7- महाकवि रणछोड़ भट्ट प्रणीतम् राजप्रशस्तिः महाकाव्यम्
- 8- अमरकाव्यम्
राजा सुमित्र से गुहादित्य तक का विवरण पुस्तक 'सूर्यवंश अने वाळा राजपूत राजवंश' (लेखक: सहदेव सिंह वाळा) से लिया गया है।
उपर्युक्त तालिका में क्रमांक 157 से 189 तक गुहिलोत कुल (मेवाड़) एवं 190 से 232 तक शिशोद/सिसोदिया वंशीय नरेशों के नाम हैं। क्रमांक 157 से आगे कोष्टक में दर्शायी गई क्रम संख्या मेवाड़ के नरेशों की पदवी दर्शाती है।
मेवाड़ के प्राचीन शिलालेखों, ग्रंथों एवं वंशावलियों में राजाओं के अन्य नाम एवं उनके भाई-पुत्रों के नाम भी उल्लेखित हैं। किन्तु उनके राज्य करने से संबंधित कोई भी प्रमाण न होने के कारण उन्हें मुख्य नरेशों की सूची में सम्मिलित नहीं किया गया है।
अतिरिक्त पुस्तक सन्दर्भ:
"विरासत का संरक्षण, आधुनिक तकनीक का अर्पण"
⚠️ महत्वपूर्ण सूचना एवं अस्वीकरण / Important Disclaimer
यह ऐतिहासिक वंशावली केवल सांस्कृतिक, शैक्षणिक और पारिवारिक विरासत के संरक्षण के उद्देश्य से तैयार की गई है।
यह कोई कानूनी दस्तावेज़, संपत्ति संबंधी प्रमाण या उत्तराधिकार का आधार नहीं है।
सभी जानकारी उपलब्ध ऐतिहासिक ग्रंथों (वाल्मीकि रामायण, श्रीमद् भागवत पुराण, विर विनोद, उदयपुर राज्य का इतिहास आदि), पारिवारिक अभिलेखों तथा मौखिक परंपरा पर आधारित है। जहां नाम अज्ञात हैं या अभिलेख लुप्त हैं, उन्हें स्पष्ट रूप से उल्लेखित किया गया है।
गोपनीयता का सम्मान: जीवित व्यक्तियों की गोपनीयता का पूरा ध्यान रखा गया है। यदि कोई व्यक्ति या परिवार इस वंशावली में अपनी या अपने परिजनों की जानकारी हटाने, सुधारने या संशोधित करने का अनुरोध करना चाहे, तो कृपया संपर्क करें। हम शीघ्रता से आवश्यक बदलाव करेंगे।
📋 शिकायत निवारण अधिकारी (DPDP Act, 2023)
Digital Personal Data Protection Act, 2023 के अंतर्गत शिकायत निवारण के लिए निम्नलिखित अधिकारी नियुक्त किया गया है:
नाम / Name: भार्गवसिंह सिसोदिया (Bhargavsinh Sisodiya) — Entry No. 226
पद / Designation: Grievance Officer & Maintainer
ईमेल / Email: bhargavsinh.bca@gmail.com
समाधान समय: शिकायत प्राप्त होने के 7 दिनों के अंदर प्रारंभिक प्रतिक्रिया। उसके अधिकतम 35 दिनों में पूर्ण निवारण (DPDP Act के अनुसार)।
शिकायत दर्ज करने का तरीका:
कृपया उपरोक्त ईमेल पर अपना नाम, संपर्क विवरण और शिकायत का स्पष्ट विवरण भेजें। हम आपकी शिकायत का निष्पक्ष और शीघ्र निवारण करेंगे।
पूर्ण अस्वीकरण: हम कोई गारंटी नहीं देते कि जानकारी पूर्णतः सही या त्रुटिरहित है। कोई भी कानूनी, संपत्ति या अन्य महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले प्रमाणित दस्तावेजों और कानूनी सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।
संग्रहकर्ता: (226) भार्गवसिंह सिसोदिया
प्रथम ड्राफ्ट: विक्रम संवत 2082, चैत्र सुद 3
Last updated: March 2026 | Personal Cultural Heritage Project